बिना सुनवाई अनुकम्पा नियुक्ति से मिली नौकरी छीनने पर मप्र हाईकोर्ट का फैसला
जबलपुर। मध्यप्रदेश हाईकोर्ट ने शिक्षा विभाग के एक अहम और मनमाने आदेश पर कड़ा रुख अपनाते हुए बड़ी राहत दी है। जस्टिस विशाल धगट की अदालत ने स्पष्ट कहा कि बिना सुनवाई सेवा समाप्त करना और बाद में जारी निर्देशों को पिछली तारीख से लागू करना कानूनन अवैध है। बैतूल के जिला शिक्षा अधिकारी द्वारा पारित आदेश को निरस्त करते हुए अदालत ने कर्मचारी की सेवा बहाल करने और सभी परिणामी लाभ देने के निर्देश दिए।
मामला अनुकंपा नियुक्ति से जुड़ा है, जिसमें याचिकाकर्ता गौरव कुमार मानकर की नियुक्ति 24 जनवरी 2022 को विधिवत रूप से की गई थी। इसके बाद लोक शिक्षण संचालनालय द्वारा 14 फरवरी 2022 को एक निर्देश जारी किया गया कि अब अनुकंपा नियुक्ति नहीं की जाए। जिला शिक्षा अधिकारी ने इसी निर्देश का सहारा लेते हुए 28 मार्च 2022 को याचिकाकर्ता की सेवाएं समाप्त कर दीं।
अनुकम्पा नियुक्ति मिलने के बाद बैतूल के स्कूल शिक्षा विभाग के लैब तकनीशियन के पद से हटाए गौरव कुमार मानकर की और से यह मामला वर्ष 2022 में दाखिल किया गया था। याचिकाकर्ता की ओर से अधिवक्ता मनोज कुशवाहा ने हाईकोर्ट में तर्क दिया गया कि बाद में जारी निर्देशों को पूर्व प्रभाव से लागू नहीं किया जा सकता, खासकर तब जब नियुक्ति पहले ही हो चुकी हो। साथ ही, सेवा समाप्ति से पूर्व कोई कारण बताओ नोटिस या सुनवाई का अवसर नहीं दिया गया, जो कि प्राकृतिक न्याय के सिद्धांतों का खुला उल्लंघन है।
मामले पर हुई सुनवाई के दौरान राज्य सरकार की ओर से शासकीय अधिवक्ता इन गंभीर कानूनी बिंदुओं का कोई ठोस जवाब नहीं दे सके। न्यायालय ने अपने आदेश में साफ कहा कि 14 फरवरी 2022 के निर्देश में कहीं भी यह नहीं लिखा है कि उसे पिछली तारीख से लागू किया जाएगा।
इन तथ्यों को देखते हुए हाईकोर्ट ने 28 मार्च 2022 का आदेश रद्द कर दिया और याचिकाकर्ता को सभी परिणामी लाभ देने का निर्देश दिया। यह फैसला शिक्षा विभाग सहित सभी प्रशासनिक अधिकारियों के लिए कानूनी चेतावनी माना जा रहा है कि वे बिना प्रक्रिया और सुनवाई के कोई दमनात्मक कार्रवाई न करें।
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